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  • 22 Feb  Shipping Corporation of India
Shipping Corporation of India

शिपिंग गाइड

लदान का तरीका
लाइनर शिपिंग में लदान के दो तरीके होते हैं अर्थात ब्रेक बल्क तरीका और कंटेनरीकृत तरीका.  देश की प्रमुख शिपिंग कंपनी के रुप में एससीआई की ब्रेक बल्क और कंटेनर शिपिंग दोनों तरीको में उपस्थिति है|
 
हालांकि,एस सी आई एक महत्वपूर्ण ब्रेक बल्क शिपिंग कंपनी के रुप में कार्य शुरु किया लेकिन संगठन धीरे-धीरे कंटेनरीकृत जहाजों की ओर संकेंद्रण किया और इस समय कंटेनरीकृत लाइनर सेवाओं में भारत से विश्व के प्रमुख व्यापारिक गंतव्यों के लिए इसकी पहचान है|
 
माप में निम्न शामिल हैं :
ब्रेक बल्क युग में लदान के लिए ग्राहक द्वारा आफर किया गया कार्गो वजन (मैट्रिक टन) या आयतन (क्यूबिक मीटर) कार्गो के स्वरुप पर निर्भर के आधार पर प्रभारित किया जाता था.  कंटेनरीकरण के युग में माप मुख्य रुप से कंटेनरों की संख्या पर आधारित होती है. (टी ई यू - 20 फुट की समान इकाईयों में मापी जाती है) जो कार्गो घेरती है|
 
कंटेनर क्या है?

कंटेनर निम्न आयाम वाला स्टील का बॉक्स होता है :

टी ई यू -  लंबाई-20' चौड़ाई-8' ऊंचाई-8'6' (समग्र)
एफ ई यू -  लंबाई-40' चौड़ाई-8' ऊंचाई-8'6' (समग्र)

एक मानक 20 फुट के कंटेनर का आंतरिक आयतन लगभग 31 क्यूबिक मीटर और 18 टन वजन ले जाने की क्षमता होती है. स्टोवेज कारकों और पैकेजिंग के प्रश्न को एक तरफ छोड़ते हुए यह स्पष्ट है कि 0.6 टन / क्यूबिक मीटर (18 टन / 31 क्यूबिक मीटर) के घनत्व के साथ कंटेनरीकृत किया जा सकता है.दहलीज का घनत्व यह सुनिश्चित करेगा कि भार उठाने वाली क्षमता और कंटेनर के भीतर उपलब्ध स्थान अधिकतम रुप से प्रयुक्त की जा सके. कोई कार्गो जिसका घनत्व 0.6 टन / क्यूबिक मीटर से बहुत अधिक हो तो कंटेनर के स्थान को पूरी तरह से उपयोग में आने के पहले ही इसकी वजन की सीमा 18 टन हो जाएगी. दूसरी ओर 0.6 टन / क्यूबिक मीटर से बहुत कम घनत्व वाले कार्गो वजन की सीमा के बहुत पहले पूरा जगह उपयोग कर लेगा. अतएव किसी सामग्री का घनत्व महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है कि इसे कंटेनरीकृत किया जाए या न किया जाए|

विशेष कंटेनर

ये कंटेनर प्रमुख: विशेष प्रकार के कार्गो के लिए बनाए जाते हैं.  इनमें से कुछ शामिल हैं:
1) खुली भारी वस्तु और मशीनरी - ओपन टॉप कंटेनर अथवा फ्लैट रॅक
2) ड्राय बल्क कार्गो - बल्क कंटेनर
3) तरल बल्क कार्गो - टैंक कंटेनर
4) टेम्परेचर सेस्न्सिटिव कार्गो - रीफ़र कंटेनर

एफ सी एल - एल सी एल कंटेनर

किसी बंदरगाह से गुजरने वाले कंटेनरों को एफ सी एल (पूर्ण कंटेनर भार) या एल सी एल (कंटेनर भार से कम) के रुप में वर्गीकृत किया जा सकता है. इससे कंटेनर में सामग्री की मात्रा से कुछ लेना देना नहीं है किंतु यह उसके मूल और गंतव्य को दर्शाता है. एफ सी एल मूल वाला कंटेनर बंदरगाह पर पूरी तरह लदा हुआ लदान के लिए तैयार आता है. एल सी एल लदान ब्रेक बल्क कार्गो के रुप में (संभवत: विभिन्न पारेषितियों ) में आता है और ग्रुपेज शेड या  ग्रुपेज फ्रेट स्टेशन (सी एफ एस) में कंटेनर में रखा जाता है|

सीएफएस एवं आईसीडी

सी एफ एस एक ग्रुपेज शेड या भण्डारण क्षेत्र होता है जो किसी बंदरगाह के समीप होता है और जहां कंटेनरों की भरायी की जाती है या उन्हें खाली किया जाता है. दूसरी ओर आईसीडी (इनलैंड कंटेनर डिपो) बंदरगाह से दूर बंदरगाह होता है|

जैसा कि इसके नाम से पता चलता है कि एक आईसीडी इंनलैंड क्षेत्र में स्थित होता है जो समुद्री बंदरगाह से बहुत दूर होता है लेकिन समुद्री बंदरगाह की सभी सुविधाएं वहां उपलब्ध होती हैं.इनलैंड लोकेशनों के लिए कंटेनर थल मार्ग द्वारा इन आईसीडी में भेजे जाते हैं और किसी भी समुद्री बंदरगाह के रुप में यहां पर सभी क्लियरिंग औपचारिकताएं पूरी की जाती हैं|

एससीआई कंटेनर बेड़ा

भारत की सबसे बड़ी शिपिंग कंपनी एससीआई में किसी भी समय इसके कमांड के अंतर्गत लगभग 48,000 टीईयू का कुल बेड़ा है.  इसमें से 5850 टीईयू एससीआई के स्वामित्व के हैं और शेष पूरे विश्व में प्रतिष्ठित कंटेनर पट्टेदारों से मास्टर लीज / दीर्घावधि लीज पर लिए गए हैं.
एससीआई अपने ग्राहकों को उनकी अपेक्षाओं के अनुसार किसी भी प्रकार के कंटेनर उपलब्ध कराता है. ये गतिविधियां एससीआई के विश्व व्यापी एजेंसी नेटवर्क द्वारा चलायी जाती हैं|
 
एस सी आई में कार्गो की लदान कैसे करें ?
 

ग्राहक विभिन्न एससीआई लाइनर सेवााओं के लिए दीर्घावधि शिपिंग समय सारिणी पर आधारित अपनी शिपिंग समय सारिणी की योजना बना सकते हैं.ई टी ए / एस सी आई की ई टी डी जहाजों के संबंध में और अधिक जानकारी और कार्गो की बुकिंग के लिए संबंधित बंदरगाहों पर हमारे एजेंटो से संपर्क किया जा सकता है|

कार्गो की लदान के बाद यदि ग्राहक अपने कंटेनरों के बारे में जानकारी चाहें तो इसे इस वेबसाइट पर देख सकते हैं|
 
यू एस कस्टम 24 घंटे अग्रिम जहाज मैनीफेस्ट नियम

अमेरिकी सीमा शुल्क ने 31 अक्टूबर, 2002 को नई विनियमावली फाइल किया है, जिससे लदान सूचना से संबंधित ग्राहकों को आयात और निर्यात व्यवसाय में प्रलेखन की बहुत अधिक कठिनाई है|