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  • 22 Feb  Shipping Corporation of India
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आईएसपीएस कक्ष

आई एस पी एस कोड (अंतरराष्ट्रीय जहाज एवं बंदरगाह सुविधा सुरक्षा संहिता) आई एम ओ द्वारा दिसम्बर, 2002 में अपनाया गया और 1 जुलाई, 2004 से इसे अनिवार्य कर दिया गया|
 
इस संहिता के उद्देश्य निम्न हैं :

• सुरक्षा खतरों का पता लगाने और उसको प्रभावित करने वाली सुरक्षा घटनाओं के लिए  निवारात्मक उपाय या अंतरराष्ट्रीय व्यापार में प्रयुक्त बंदरगाह सुविधाओं के लिए संविदा करने   वाली सरकारों, सरकारी एजेंसियों, स्थानीय प्रशासनों तथा नौवहन बंदरगाह उद्योगों के बीच  सहयोग से अंतरराष्ट्रीय ढांचा तैयार करना|
 
•  समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संविदा करने वाली सरकारों, सरकारी एजेंसियों,स्थानीय प्रशासकों और नौवहन एवं बंदरगाह उपयोगों की राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संबंधित  भूमिकाएं और दायित्व स्थापित करना|
 
•  सुरक्षा संबंधी सूचना को शीघ्र और कुशलतापूर्वक एकट्ठा करना और उसका आदान प्रदान      करना|
 
•  सुरक्षा मूल्यांकन के लिए सिद्धांत बनाना ताकि परिवर्तनशील सुरक्षा स्तरों पर प्रतिक्रिया के लिए  योजनाएं और क्रियाविधियां बनायी जा सकें|
 
आत्मविश्वास सुनिश्चित करना कि पर्याप्त और समानुपात में समुद्री सुरक्षा उपाय किए गए हैं|
 
उपर्युक्त उद्देश्यों को पूरा करने के लिए एससीआई ने अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक द्वारा हस्ताक्षरित सुरक्षा नीति रखा है. जिसका उद्देश्य अपने कर्मी दल, यात्रियों और कार्गो के लिए पूरे विश्व में समुद्र और बंदरगाहों पर रहते हुए सुरक्षित एवं प्रतिरक्षित जहाज उपलब्ध कराना है|
 
एससीआई  अपनी सुरक्षा नीति अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए निम्न उद्देश्यों के प्रति बचनबद्ध है :
 
•  इसकी जहाजों और कर्मी दल, यात्रियों और कार्गो की सुरक्षा|

•  जहाज सुरक्षा योजना के कार्यान्वयन और अनुरक्षण में इसकी जहाजों को सहायता देना|

• आई एस पी एस कक्ष का प्रमुख कंपनी का सुरक्षा अधिकारी (सी एस ओ) होता है जो जहाजों  के सुरक्षा पहलुओं की निगरानी करता है और निम्न सुनिश्चित करता है :

•  बेड़े के हर जहाज का जहाज सुरक्षा मूल्यांकन (एस एस ए) किया गया है|

•  जहाज सुरक्षा मूल्यांकन पर आधारित हर जहाज के लिए जहाज सुरक्षा योजना (एस एस पी) विकसित की गई है|

•  इस तरह से विकसित की गई जहाज सुरक्षा योजना महानिदेशालय (डी जी एस) द्वारा जांची  जाती है और अनुमोदित की जाती है|

•  सुरक्षा कार्यान्वयन के पश्चात आंतरिक एवं बाहरी लेखा परीक्षाएं की जाती हैं यदि कोई कमी  पायी जाती है तो उसे सुरुस्त किया जाता है और सांविधिक प्रमाणपत्र (आई एस एस सी एवं  सी एस आर) जारी की जाती है और जहाज से जोड़ा जाता है|

•  जहाज सुरक्षा योजना की सतत प्रभावकारिता की जांच के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा प्रबंधन लेखा
परीक्षाओं के साथ वार्षिक आंतरिक लेखा परीक्षाएं की जाती हैं और पता लगायी गई कमियों /
गैर अनुरुपता को दुरुस्त किया जाता है|
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•  सुरक्षा गतिविधियों की समीक्षा की जाती है और यदि आवश्यक हुआ तो जहाज सुरक्षा योजनाओं को संशोधित किया जाता है|

•  सभी स्रोतों से उपलब्ध सुरक्षा सूचना जमा की जाती है और संबंधित सूचना को जहाज पर प्रचालन विभाग को सभी संबंधितों की सुरक्षा जागरुकता को बढ़ाने के लिए भेजा जाता है|

• जहाज का संबंधित कार्मिक और कार्यालय को आवश्यक प्रशिक्षण दिया जाता है|

• निरापदता अपेक्षाओं और सुरक्षा अपेक्षाओं के बीच संगतता अनुरक्षित की जाती है|

•  आवश्यक सुरक्षा ड्रिल और अभ्यास किया जाता है|

•  सुरक्षा संबंधी सूचना के लिए सभी जहाजों पर सी एस ओ का संपर्क नम्बर 24 घंटे उपलब्ध रहता है|
 
नौवहन महानिदेशालय में जहाजों से सुरक्षा सावधानी की निगरानी और सुरक्षा संबंधी सूचना और अदन की खाड़ी से खतरों के लिए 24 घंटे एक विशेष कक्ष निर्मित किया गया है|
 
संपर्क का ब्यौरा
 
डीजीएस कम्यूनिकेशन सेंटर
 
टेलीफोन : 91 22 2261 0606 / 91 22 2261 4646 / 91 22 32959320
 
ई-मेल
SSAs - dgcommcentre@vsnl.net
Routine - dgcommcentre@satyammail.net
 
आईएसपीएस को संपर्क के लिए व्यक्ति
 
कप्तान एन.एस. रेगे
महाप्रबंधक (आईएसपीएस)
टेली. : 022-2277 2858