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  • 23 Oct  Shipping Corporation of India
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ध्यानाकर्षक संरक्षण नीति

1. पृष्ठभूमि
1.1 कंपनी अपना कारोबार व्यावसायिकता, ईमानदारी, सत्यनिष्ठा तथा नैतिकता के उच्चतम मानदंडों को अपनाते हुए निष्पक्ष और पारदर्शी रूप से करने में विश्वास रखती है.
1.2 कंपनी एक ऐसी संस्कृति विकसित करने हेतु प्रतिबद्ध है जहाँ सभी कर्मचारियों के लिए किसी अनैतिक व्यवहार, धोखाधड़ीपूर्ण या किसी अनुचित परिपाटी अथवा कदाचार के मामलों के खिलाफ अपनी आवाज उठाना सुरक्षित हो.
1.3 सूचीबद्ध कंपनियों तथा स्टॉक एक्सचेंजों के मध्य लिस्टिंग करार के खंड 49 में अन्य बातों के साथ-साथ इस बात का भी प्रावधान है कि सभी सूचीबद्ध कंपनियाँ अपने कर्मचारियों के लिए एक ऐसा तंत्र स्थापित करें जिसके माध्यम से वे कंपनी में होने वाले किसी अनैतिक व्यवहार, वास्तविक अथवा संदेहास्पद धोखाधड़ी के मामले या कंपनी की आचार संहिता अथवा नैतिकता नीति के उल्लंघन संबंधी मामलों को प्रबंधन के समक्ष ला सकें. इस खंड में उन कर्मचारियों को परिपीड़न से बचाने हेतु पर्याप्त संरक्षण देने के तंत्र की भी व्यवस्था है जिन्होंने इस तंत्र का प्रयोग करते हुए किसी बात का प्रकटन किया था. इतना ही नहीं, इस तंत्र के अंतर्गत आपवादिक मामलों में लेखापरीक्षा समिति के अध्यक्ष तक सीधे पहुंचने का भी प्रावधान है.
1.4 भारी उद्योग तथा लोक उद्यम मंत्रालय, लोक उद्यम विभाग ने अपने कार्यालय ज्ञापन संख्या 18(8)/2005-जी एम दिनांक 14 मई, 2010 के माध्यम से केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) के लिए कार्पोरेट गवर्नैंस पर दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इन दिशा-निर्देशों के अनुसार कंपनी ध्यानाकर्षण संरक्षण नीति लागू कर सकती है ताकि कंपनी में एक ऐसा तंत्र स्थापित किया जा सके जिसके माध्यम से कर्मचारी कंपनी में होने वाले किसी अनैतिक व्यवहार, वास्तविक तथा संदेहास्पद धोखाधड़ी के मामले या आचार-नीति अथवा कदाचार से संबंधित कंपनी के सामान्य दिशा-निर्देशों के उल्लंघन से संबंधित मामलों को कंपनी के ध्यान में लाया जा सके.
1.5 कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 177(9) में इस बात का प्रावधान है कि प्रत्येक लिस्टेड कंपनी अथवा इस प्रकार की या ऐसे समूहों की कंपनियाँ, जो भी निर्धारित हो, के निदेशकों तथा कर्मचारियों के लिए एक निगरानी तंत्र स्थापित करेगी ताकि वे वास्तविक सरोकारों के नियमों के अंतर्गत तथा उनके अनुरूप रिपोर्टिंग कर सकें.
1.6 इस नीति का प्रयोजन है अच्छी मंशा से किए गए ध्यानाकर्षण के लिए कर्मचारियों को दमन और परिपीड़न से संरक्षण प्रदान करना तथा उन्हें कंपनी में होने वाली अनैतिक तथा अनुचित परिपाटियों या अन्य गलत कार्यो को सद्भावपूर्वक सक्षम प्राधिकारियों/लेखा परीक्षा समिति के ध्यान में लाने के अवसर प्रदान करना तथा ऐसे कर्मचारियों को प्रबंधकीय कर्मियों ढ्वारा की जाने वाली द्वेषपूर्ण प्रतिकूल कार्रवाई से बचाना. तथापि इस नीति के अंतर्गत ध्यानाकर्षक कर्मचारी की कमजोर कार्यक्षमता के लिए उसके खिलाफ की गई अनुशासनात्मक कार्रवाई या कदाचार जिसका उसके द्वारा किए गए प्रकटनों से कोई संबंध नहीं है के लिए संरक्षण प्राप्त नहीं होगा.
1.7 स्पष्टता की दृष्टि से यह बताना उचित होगा कि ध्यानाकर्षण संरक्षण नीति का अर्थ एस सी आई में उपलब्ध सतर्कता तंत्र के कदम को किसी भी रूप में कम करना नहीं है. इस नीति के तहत किसी कर्मचारी द्वारा किया गया कोई प्रकटन जिसमें सतर्कता का कोण विद्यमान है को समय समय पर कंपनी में लागू सतर्कता दिशा-निर्देशों के अनुसार मुख्य सतर्कता अधिकारी के ध्यान में लाया जाए.
2. प्रयोज्यता :
2.1 यह नीति कंपनी के सभी कर्मचारियों पर प्रयोज्य या लागू होती है.
3. परिभाषाएं :
3.1 प्रतिकूल कार्मिक कार्रवाई - नियोजन संबंधी कोई कार्य या निर्णय अथवा प्रबंध कर्मियों द्वारा उचित कार्रवाई न करना जिससे कर्मचारी का नियोजन प्रभावित होता हो, और जो मुआवजे, वेतनवृद्धि, पदोन्नति, कार्यस्थल, कार्य प्रकृति, प्रमुक्ति, अवकाश तथा प्रशिक्षण या अन्य विशेषाधिकार सहित होंगे किंतु उन तक सीमित नहीं होंगे.
3.2 कथित गलत आचरण का अर्थ होगा कानून का उल्लंघन, कंपनी की आचार संहिता या आचार नीति का उल्लंघन, कुव्यवस्था, धन का गबन, धोखाधड़ी, सार्वजनिक स्वास्थ्य तथा सुरक्षा को पर्याप्त तथा विषिष्ट रूप से खतरा पहुंचाना अथवा प्राधिकार का दुरुपयोग.
3.3 लेखा परीक्षा समिति का अर्थ होगा कंपनी के निदेशक मंडल की एक समिति जिसका गठन कंपनी अधिनियम 1956 की धारा 292-A के साथ पठित कंपनी तथा स्टॉक ऐक्स्चेंजों के मध्य सम्पन्न लिस्टिंग करार के खंड 49 के अनुसरण में किया गया है.
3.4 कंपनी/एस.सी.आई. का अर्थ है "दि शिपिंग कार्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड" या "भारतीय नौवहन निगम लिमिटेड".
3.5 अनुपालन अधिकारी का अर्थ होगा कंपनी का "कंपनी सचिव" तथा इस प्रयोजन हेतु निदेशक मंडल द्वारा पदनामित अधिकारी.
3.6 सक्षम प्राधिकारी का अर्थ होगा एस.सी.आई. का अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक (अ.प्र.नि.) तथा इसमें वह व्यक्ति शामिल होगा जिसे वह समय-समय पर इस नीति के तहत अपने अधिकारों का प्रत्यायोजन करे. हितों में टकराव की स्थिति में (अ.प्र.नि. संबंधित कर्ता व्यक्ति होने से) सक्षम प्राधिकारी का अर्थ होगा लेखा परीक्षा समिति का अध्यक्ष.
3.7 कर्मचारी का अर्थ होगा एस.सी.आई. के आचरण, अनुशासन तथा अपील नियमावली, 2011 तथा जिसे समय-समय पर संशोधित किया जाता हो, में परिभाषित कर्मचारी.
3.8  सद् भाव :
3.8.1 यदि अनैतिक एवं अनुचित परिपाटियों अथवा किसी अन्य कथित गलत आचरण को संप्रेषित करने का समुचित आधार हो तो वह कर्मचारी सद्भावपूर्वक संप्रेषित करते हुए माना जाएगा.
3.8.2 जब कर्मचारी को अपने संप्रेषण का वास्तविक आधार ही ज्ञात न हो या फिर उसे इस बात की जानकारी थी या वाजिब तौर पर होनी चाहिये थी कि अनैतिक तथा अनुचित परिपाटियों या कथित गलत आचरण के संबंध में उसका संप्रेषण दुर्भावनापूर्ण, असत्य अथवा मनगढंत था तो ऐसी स्थिति में सद्भाव में कमी माना जाएगा.
3.9 अनुचित गतिविधि का अर्थ होगा अनैतिक व्यवहार, वास्तविक अथवा संदेहास्पद धोखाधड़ी या एस.सी.आई. के किसी कर्मचारी द्वारा एस.सी.आई. के कदाचार संबंधी सामान्य दिशा-निर्देशों या आचार नीति का उल्लंघन.
3.10 अन्वेषक का अर्थ होगा वे व्यक्ति जिन्हें सी.बी.आई., आयकर कार्यालय, एस.सी.आई. के लेखा परीक्षक तथा पुलिस जैसे संरक्षित प्रकटनों के लिए अन्वेषण करने के सबंध में स्क्रीनिंग कमिटी ने संस्वीकृत किया हो.
3.11 प्रबंधकर्मी - इस नीति के लिए प्रबंधकर्मियों में पूर्णकालिक नियोजन में निदेशक, अधिकारी, प्रबंधक, विभागाध्यक्ष, वरिष्ठ या अन्य ऐसे कर्मचारियों का समावेश है जो महत्वपूर्ण वैयक्तिक निर्णयों को वस्तुगत रूप से प्रभावित करने का अधिकार रखते हैं.
3.12 नीति अथवा इस/यह नीति का अर्थ होगा "ध्यानाकर्षण नीति".
3.13 संरक्षित प्रकटनों का अर्थ है सद्भावपूर्वक किया गया ऐसा प्रकटन या प्रदत्त सूचना जो अनैतिक या "अनुचित गतिविधि" को प्रमाणस्वरूप माना जा सकता है.
3.14 स्क्रीनिंग समिति का अर्थ होगा एस.सी.आई. की ध्यानाकर्षण नीति के अंतर्गत गठित की गई कमिटी जिसमें अध्यक्ष तथा प्रबंध निदेशक (सी.एम.डी.) या उनकी अनुपस्थिति में उनके द्वारा नामित कोई कार्यवाहक निदेशक तथा लेखापरीक्षा समिति का अध्यक्ष अथवा उनकी अनुपस्थिति में उनके द्वारा नामित लेखापरीक्षा समिति का कोई सदस्य.
3.15 सेवा नियमावली का अर्थ होगा एस.सी.आई. की आचरण, अनुशासन तथा अपील नियमावली, 2011 तथा जो समय-समय पर संशोधित हो.
3.16 कर्ता का अर्थ होगा कोई कर्मचारी-अधिकारी/स्टॉफ जिसके विरुद्ध अथवा उसके संबंध में कोई संरक्षित प्रकटन किया गया है या जाँच-पड़ताल के दैरान कोई सबूत एकत्र किया गया हो.
3.17 ध्यानाकर्षक का अर्थ होगा कोई कर्मचारी जो इस नीति के अंतर्गत कोई संरक्षित प्रकटन करता है.
4. नीति की व्याप्ति:
4.1 यह नीति अनाचार तथा निम्नलिखित के संबंध में हुई/सशंकित घटनाओं को समाहित करती है:
 ए) प्राधिकार का दुरुपयोग
 बी) कंपनी के हितों से पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाते हुए अथवा फिलहाल लागू किसी कानून का उल्लंघन करते हुए कार्य करना.
 सी) लापरवाही बरतना जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य तथा सुरक्षा के लिए बड़ा तथा असामान्य खतरा उत्पन्न हो गया हो.
 डी) कंपनी के डाटा/रेकार्ड से छेड़-छाड़ करना.
 ई) धोखाधड़ी सहित वित्तीय अनियमितता बरतना.
 एफ) आपराधिक कृत्य.
 जी) गोपनीय/उपयुक्त सूचना चुराना.
 एच) कानून/विनियम का जानबूझकर उल्लंघन करना.
 आई) कंपनी की निधियों/संपत्ति का नुकसान/दुरुपयोग करना.
 जे) कर्मचारी आचार संहिता या नियमों का उल्लंघन करना.
 के) कोई अन्य अनैतिक, पक्षपातपूर्ण, तरफ़दारी वाला, अविवेकी कृत्य.
 एल) बिना किसी प्रतिफल अथवा अपर्याप्त प्रतिफल पाने के लिए किसी ऐसे व्यक्ति से कुछ मूल्यवान वस्तु प्राप्त करना जिससे उसका या उसके किसी मातहत का कोई कार्यालयीन सरोकार है या होना संभावित है तथा जिसे वह प्रभावित कर सकता है.
 एम) जिन मामलों में कोई सार्वजनिक हित न हो उनमें आवश्यकता से अधिक अपने विवेकाधिकार का प्रयोग करना.
4.2 निम्नलिखित मामले इस नीति की व्याप्ति से बाहर रखे गये हैं :
 ए) सामान्य प्रताड़ना.
 बी) असंतोषजनक नियुक्तियाँ तथा भर्तियाँ.
 सी) कंपनी की नीतियाँ.
 डी) परिचालनात्मक अकार्यक्षमता.
4.3 इस नीति का प्रयोग कंपनी के शिकायत प्रक्रिया तंत्र के स्थान पर अथवा अपने सहकर्मियों पर दुर्भावनापूर्ण या झूठे आरोप लगाने के लिेए नहीं किया जाना चाहिये.
5. व्याख्या :
 जिन तकनीकी शब्दों को इस नीति में परिभाषित नहीं किया गया है उनके वही अर्थ होंगे जो उनके लिए समय-समय पर संशोधित कंपनी अधिनियम, 1956 और/या एस.ई.बी.आई. विनियमों में दिए गए हैं.
6. मार्गदर्शी सिद्धांत :
6.1 संरक्षित प्रकटनों पर एक समयबद्ध योजना के तहत कार्रवाई की जाएगी.
6.2 ध्यानाकर्षक की पूर्ण गोपनीयता रखी जाएगी.
6.3 ध्यानाकर्षक तथा/अथवा संरक्षित प्रकटनों पर कार्रवाई करने वाले व्यक्तियों को सताया नहीं जाएगा.
6.4 संरक्षित प्रकटनों के सबूत छुपाए नहीं जाएंगे तथा सबूत छुपाने या नष्ट करने वालों के खिलाफ़ अनुशासनात्मक कार्रवाई सहित समुचित कार्रवाई की जाएगी.
6.5 संरक्षित प्रकटन के "कर्ता" अर्थात् कर्मचारी जिसके खिलाफ या संबंध में संरक्षित प्रकटन किया गया है को सुनवाई का अवसर दिया जाएगा.
6.6 ध्यानाकर्षक किसी अनुचित गतिविधि या परिपाटी की सूचना शीघ्रातिशीघ्र सक्षम प्राधिकारी को देगा. यद्यपि उन्हें सबूत देने की जरूरत नहीं है, उनके लिेए चिंता का कारण ही पर्याप्त है.
6.7 ध्यानाकर्षक पूरी गोपनीयता बरतते हुए जाँच अधिकारियों को सहयोग देगा.
7. ध्यानाकर्षक की भूमिका
7.1 ध्यानाकर्षक की भूमिका एक ऐसी रिपोर्टिंग पार्टी की होती है जिसके पास विश्वसनीय सूचना हो.
7.2 ध्यानाकर्षक के लिए यह आवश्यक या अपेक्षित नहीं कि वह एक अन्वेषक या तथ्यों का पता लगाने वाले की तरह कार्य करे तथा वे किसी मामले में अपेक्षित उचित सुधारात्मक या उपचारक कार्रवाई निर्धारित करे.
7.3 यदि किसी मामले में अपेक्षित हो तो ध्यानाकर्षक अन्वेषण से भी जुड़ सकते हैं. तथापि उन्हें उसमें भाग लेने का अधिकार नहीं होगा.
7.4 संरक्षित प्रकटन पर एक सक्षम प्राधिकारी समुचित रूप से कार्य करेगा.
7.5 विधिक व अन्य कारणों को छोड़कर ध्यानाकर्षक को यह जानने का अधिकार होगा कि उसके प्रकटन का क्या निपटान किया गया.
8. आंतरिक नीति तथा नीति के तहत सुरक्षा
8.1  यह नीति कंपनी की एक आंतरिक नीति है.
8.2 यह नीति कंपनी को किसी ऐसे कर्मचारी के विरूद्ध प्रतिकूल कार्मिक कार्रवाई करने से रोकती है जिसने सद्भावपूर्वक या नेक नीयत से किसी अनुचित परिपाटी या अनुपालन अधिकारी के किसी कथित गलत आचरण का प्रकटन किया हो.  वह कर्मचारी जिसके विरुद्ध इस नीति के तहत सूचना प्रकटन के कारण कोई कार्मिक कार्रवाई की गई है, सक्षम प्राधिकारी के पास जा सकता है अथवा अपवादात्मक मामलों में उचित राहत पाने के लिए निदेशक मंडल के पास जा सकता है.  जाँच-पड़ताल में सहायता करने वाले किसी कर्मचारी को भी, ध्यानाकर्षक की ही तरह संरक्षण प्रदान किया जाएगा.
9. झूठा आरोप एवं वैध नियोजन कार्रवाई
9.1 कोई कर्मचारी जो जान-बूझ कर किसी झूठे, मनगढंत या निराधार अनैतिक आचरण या कथित गलत आचरण की शिकायत अनुपालन अधिकारी को करता है तो उसके विरुद्ध कंपनी के नियमों, नीतियों तथा प्रक्रियाओं के अनुसरण में नियोजन की शर्तों के अनुसार प्रमुख दंड सहित अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है. इसके अलावा कर्मचारी इस नीति का इस्तेमाल उसके द्वारा किए गए किसी प्रकटन के अलावा कंपनी के नियमों तथा नीतियों के अंतर्गत किन्हीं सत्य कारणों से उसके विरुद्ध चल रही कार्रवाई से बचने के लिए नहीं कर सकता.
9.2 वे ध्यानाकर्षक जो संरक्षित प्रकटन प्रस्तुत करते हैं और बाद में वे दुर्भावनापूर्ण या विद्वेषपूर्ण पाये जाते हैं अथवा वे ध्यानाकर्षक जो तीन या उससे ज्यादा संरक्षित प्रकटन प्रस्तुत करते हैं और बाद में वे मनगढंत, निराधार या गैर-सद्भावपूर्ण ढंग से रिपोर्ट किये गये पाये जाते हैं तो उन्हें आगे इस नीति के तहत संरक्षित प्रकटन प्रस्तुत करने हेतु अयोग्य घोषित किया जाएगा.
10. प्रक्रियाएँ - संरक्षित प्रकटन हेतु आवश्यकताएं और उनकी हैंडलिंग
10.1 संरक्षित प्रकटन की सूचना शीघ्रातिशीघ्र अनुपालन अधिकारी को दी जाएगी किंतु प्रकटनों के पता लगने से निरंतर 45 कैलेंडर दिनों के बाद नहीं.
10.2 संरक्षित प्रकटन/शिकायत एक पत्र के साथ संलग्न होनी चाहिये तथा उस पत्र पर ध्यानाकर्षक/शिकायतकर्ता की पहचान अर्थात् नाम, कर्मचारी कोड नं. तथा स्थान का उल्लेख कर उसे एक बंद/सुरक्षित/सील्ड लिफ़ाफ़े में बंद कर भेजना चाहिये.  इस प्रकार सुरक्षित/सील्ड लिफ़ाफा सक्षम प्राधिकारी के नाम लिखा होना चाहिये तथा उस पर "संरक्षित प्रकटन" स्पष्ट अक्षरों में लिखा होना चाहिये. (यदि लिफ़ाफे पर "संरक्षित प्रकटन" नहीं लिखा होगा तथा वह लिफाफा बंद/सील्ड/सुरक्षित नहीं होगा तो ध्यानाकर्षक को नीति में उल्लेख किए अनुसार सुरक्षा देना संभव नहीं होगा).
शिकायतप्राप्तकर्ता प्राधिकारी शिकायत की कोई प्राप्ति सूचना नहीं देंगे तथा शिकायतकर्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे लिफ़ाफे पर (यदि कूरियर या पोस्ट से भेजी हो तो) अपना नाम और पता नहीं लिखें जो उनके हित में होगा. प्राधिकारी सामान्य तौर पर शिकायतकर्ता के हित को ध्यान में रखते हुए इस संबंध में कोई पत्राचार नहीं करेंगे बशर्ते कि ऐसा करना वास्तव में जरूरी न हो.
10.3 यदि कर्मचारी अपना प्रकटन लिखित में देने में असमर्थ है तो वह सक्षम प्राधिकारी को स्वयं या अपने वरिष्ठ अधिकारी के जरिये अथवा किसी अन्य कर्मचारी के माध्यम से सम्पर्क कर सकता है. सक्षम प्राधिकारी उस कर्मचारी के प्रकटन का एक लिखित संक्षिप्त रूप बनवाकर कर्मचारी को उसकी एक प्रति उपलब्ध कराएगा.
10.4 यदि ध्यानाकर्षक को यह विश्वास है कि सक्षम प्राधिकारी और उसके हितों में टकराव है तो वह अपना प्रकटन एस.सी.आई. की लेखापरीक्षा समिति के अध्यक्ष को सीधे भेज सकता है.
10.5 अनाम या छद्म नाम से भेजे गए संरक्षित प्रकटनों पर विचार नहीं किया जाएगा.
10.6 संरक्षित प्रकटन अंग्रेजी, हिंदी या ध्यानाकर्षक के नियोजन स्थान की स्थानीय भाषा में टाइप किया अथवा पठनीय रूप में लिखा हुआ होना चाहिये और उसमें संबंधित अनुचित गतिविधि या चिंता के मुद्दे का स्पष्ट रूप से उल्लेख होना चाहिये. इस प्रकार की गई रिपोर्ट वास्तविक होनी चाहिए, मनगढंत नहीं.  उसमें अधिक से अधिक संगत जानकारी का उल्लेख होना चाहिये ताकि प्राथमिक समीक्षा तथा उचित आकलन किया जा सके.
10.7 कमीशन ऑफ इन्क्वाइरी एक्ट 1952 के तहत किसी अनुचित गतिविधि की जाँच, जो उस जाँच का विषय हो, इस नीति के अंतर्गत नहीं आएगी.
10.8 संरक्षित प्रकटन भेजने के लिए सक्षम प्राधिकारी के विवरण तथा पता निम्नानुसार है:
 अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक
 सक्षम प्राधिकारी
 ध्यानाकर्षक तंत्र
 भारतीय नौवहन निगम लि.
 245 मैडम कामा मार्ग
 मुंबई-400021
10.9 अध्यक्ष, लेखापरीक्षा समिति को संरक्षित प्रकटन प्रेषित करने के सम्पर्क विवरण निम्नानुसार है :
 अध्यक्ष, लेखापरीक्षा समिति
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10.10 सक्षम प्राधिकारी इस प्रकार प्राप्त संरक्षित प्रकटन के लिफाफे को इस कार्य के लिए समर्पित एक गोपनीय अनुभाग को मार्क कर देगा और इस प्रकार यह अनुभाग प्राप्त प्रकटन का रेकार्ड रखते हुए उसे स्क्रीनिंग समिति के समक्ष प्रस्तुत करेगा.
10.11 स्क्रीनिंग समिति मनगढंत शिकायतों को अलग करते हुए उन संरक्षित प्रकटनों को अलग कर इस प्रयोजन के लिेए नामित जाँच अधिकारी को गोपनीय अनुभाग के माध्यम से भेज देगी, जिन पर आगे जाँच की जानी अपेक्षित है.
10.12 स्क्रीनिंग समिति जल्द से जल्द बैठक आयोजित करने का प्रयास करेगी जो अधिमानत: संरक्षित प्रकटन मिलने के 15 दिनों के अंदर होगा.
11. जाँच तथा जाँचकर्ताओं की भूमिका:
जाँच
11.1 जाँच प्रारंभ की जाएगी बशर्ते जाँच समिति प्राथमिक समीक्षा के पश्चात इस बात से संतुष्ट हो कि:
 ए) कथित कार्य एक अनुचित या अनैतिक गतिविधि अथवा आचरण की श्रेणी में आता हो, और
 बी) लगाए गए आरोपों को जाँच करने योग्य सूचनाओं का समर्थन हो तथा जिन मामलों में सूचनाओं का समर्थन नहीं है तो यह माना गया हो कि उसकी जाँच की जानी चाहिये.
11.2 स्क्रीनिंग समिति द्वारा जाँच करने हेतु लिए गए निर्णय का अर्थ आरोप से नहीं लगाया जाना चाहिये ओर उसे तटस्थ तथ्य खोजी प्रक्रिया मानी जानी  चाहिये.
11.3 कर्ता तथा ध्यानाकर्षक की पहचान गोपनीय रखी जाएगी.
11.4 प्राथमिक जाँच के दौरान कर्ता को सामान्यतया उन पर लगाए आरोपों की सूचना दे दी जाएगी तथा जाँच के दौरान उन्हें अपने इनपुट देने का अवसर दिया जाएगा.
11.5 कर्ता की यह जिम्मेदारी होगी कि वह जाँच के दौरान जाँचकर्ताओं से उस सीमा तक सहयोग करे कि इस प्रकार किया गया सहयोग लागू कानूनों के अंतर्गत स्व-अभियोजन हेतु उपलब्ध सुरक्षा से समझौता न कर ले.
11.6 कर्ता की यह जिम्मेदारी होगी कि वह जाँच में हस्तक्षेप न करें. सबूतों को न रोके रखें, ना ही नष्ट करें या उनसे छेड़-छाड़ न करें तथा वह गवाहों को प्रभावित न करें, सिखाएं-पढाएं नहीं और ना ही धमकी दें या उकसाएँ.
11.7 जब तक कि ऐसा न करने के ठोस कारण न हो, कर्ता को किसी जाँच रिपोर्ट में उपलब्ध वस्तुपरक परिणामों का प्रतिसाद देने का अवसर दिया जाएगा. कर्ता के विरुद्ध गलत काम करने के किसी भी आरोप को तब तक ग्राह्य नहीं माना जाएगा जब तक कि आरोपों के समर्थन में पर्याप्त सबूत उपलब्ध न हों.
11.8 जाँच प्रक्रिया सामान्य तौर पर संरक्षित प्रकटन मिलने की तारीख से 45 दिनों में या सक्षम प्राधिकारी की अनुमति से रेकार्ड किए गए कारणों से बढ़ाई गई अवधि में पूर्ण हो जाएगी.
11.9 कर्ता को जाँच का परिणाम जानने का अधिकार है.
जाँचकर्ता की भूमिका
11.10 जाँचकर्ता तथ्यों का पता लगाने तथा उनका विश्लेषण करने की प्रक्रिया पूर्ण करेंगे. जाँचकर्ता अपनी जाँच अवधि तथा परिधि में रह कर कार्य करते हुए सक्षम प्राधिकारी से अपने अधिकार प्राप्त करेंगे.  जाँचकर्ता अपनी रिपोर्ट सक्षमा प्राधिकारी को प्रस्तुत करेगा.
11.11 सभी जाँचकर्ता अपनी भूमिका स्वतंत्र तथा बिना भेद-भाव के निभाएंगे. जाँचकर्ताओं का कर्तव्य है कि वे न्यायसंगत, वस्तुनिष्ठापूर्वक, सम्यक् प्रकार से, नैतिक आचरण का पालन करते हुए तथा व्यावसायिक मानदंडों के अनुरूप अपना कार्य करें.
12. कार्रवाई
12.1 यदि सक्षम प्राधिकारी का यह मत है कि जाँच अनुचित गतिविधि का प्रकटन करती है जो कानूनन दंडनीय अपराध है तो वह संबंधित प्राधिकारी को लागू सांविधिक प्रावधनों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के साथ साथ मामले को उचित कार्रवाई हेतु एस.सी.आई. के मुख्य सतर्कता अधिकारी को भेजने तक का निर्देश दे सकता है.
12.2 सक्षम प्राधिकारी संरक्षित प्रकटन में वर्णित किसी अनुचित गतिविधि के निवारण के लिए उचित उपाय करेगा तथा/अथवा वह उसे फिर से न होने की रोकथाम भी करेगा.
12.3 यदि जाँच से यह पता चलता है कि उस संरक्षित प्रकटन पर आगे कोई कार्रवाई अपेक्षित नहीं है तो रिपोर्ट को गोपनीय अनुभाग में फाइल कर दिया जाएगा.
13. दस्तावेजों को सहेज कर रखना   
13.1 सभी लिखित या दस्तावेजी संरक्षित प्रकटनों और उनसे संबंधित जाँच के परिणामों को कंपनी कम से कम सात वर्षों तक सहेज कर रखेगी.
14. रिपोर्टिंग तथा समीक्षा
14.1 सक्षम प्राधिकारी प्राप्त संरक्षित प्रकटनों तथा की गई जाँच एवं की गई कार्रवाई की एक तिमाही रिपोर्ट समीक्षा हेतु लेखा-परीक्षा समिति को प्रस्तुत करेंगे.
15. अधिसूचना
15.1 लागू होने पर इस नीति की सूचना एक परिपत्र के जरिये सभी कर्मचारियों में परिचालित की जाएगी. सभी कर्मचारियों को कार्यग्रहण करने पर मानव संसाधन विभाग इस नीति की एक प्रति उपलब्ध कराएगा.  यह नीति और इसमें होने वाले सभी संशोधन/परिशोधन कंपनी की आंतरिक तथा बाह्य वेबसाइट पर सदैव उपलब्ध रहेंगे.
16. वार्षिक अभिवचन
16.1 कंपनी वार्षिक तौर पर इस बात का अभिवचन देगी कि उसने किसी भी कर्मचारी को सक्षम प्राधिकारी/लेखापरीक्षा समिति से मिलने से नहीं रोका है तथा उसने ध्यानाकर्षक की प्रतिकूल कार्मिक कार्रवाई से रक्षा की है. यह अभिवचन कार्पोरेट गवर्नेंस के एक भाग के रूप में कंपनी की वार्षिक रिपोर्ट के साथ संलग्न होना चाहिये.
17.  संशोधन
लेखा परीक्षा समिति द्वारा समीक्षा के बाद इस नीति को कंपनी का निदेशक मंडल कभी भी संशोधित कर सकता है.