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  • 22 Feb  Shipping Corporation of India
Shipping Corporation of India

वर्तमान स्थिति

वस्तुगत:लगभग चार दशकों से जहाजों का परिचालन करते हुए एससीआई ने आज विश्व के समुद्री नक्शे पर एक महत्वपूर्ण स्थान बना लिया है.यह देश की एक प्रमुख नौवहन कंपनी है जिसके पास दिनांक 01.05.2005 को स्वामित्ववाले 26.76 लाख जीटी (46.19 लाख डीडब्ल्यूटी) वाले 83 जहाजों का नौबेड़ा है तथा कुल भारतीय टनेज का लगभग 34  हिस्सा है|
 
इसके अलावा, एससीआई भाड़े के जहाज भी परिचालित करती है तथा विभिन्न सरकारी विभागों एवं अन्य संगठनों की ओर से 1.23 लाख जीटी (0.68 लाख डीडब्ल्यूटी) के 53 जहाजों का जनबल आयोजन एवं प्रबंध कार्य भी करती है.  एससीआई के अत्यंत विविधीकृत नौबेड़े में आधुनिक तथा इंर्धन-कार्यक्षम जहाजों का समावेश है जो उसे अन्य मालिकाना नौबेड़े की तुलना में गुणात्मक दर्जा और विशिष्ट प्रतिस्पर्धात्मक प्रदान करता है|
 
वित्तीय: वर्तमान में, एससीआई की प्राधिकृत पूँजी रु.450.00 करोड़ तथा प्रदत्त पूँजी 283.3 करोड़ है.  वित्तीय वर्ष 2003-04 के लिए एससीआई ने रु.3,179.8 करोड़ का आवर्त तथा रु.626.9 करोड़ का कर पश्चात् शुध्द लाभ दर्ज किया.  कंपनी ने वर्ष 2003-04 के लिए 170% का विशेष अंतरिम लाभांश की घोषणा कर भुगतान किया| 
 
परिचालन: व्यावहारिक दृष्टिकोण से एससीआई नौवहन कारोबार के सभी क्षेत्रों में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक स्तरों पर निम्नलिखित सेवाएँ परिचालित करती है:
 
(i) लाइनर एवं यात्री सेवा: एससीआई भारत से सुदूर-पूर्व-जापान, यू.के. महाद्वीप, यूएसए (पूर्वी तट) कनाड़ा, दक्षिण अफ्रीका, भूमध्यसागर एवं काला सागर पोर्टों के बीच वैश्विक लाइनर सेवाओं के नेटवर्क का परिचालन करती है|
 
कंटेनरीकृत सेवाओं की ओर बढ़ते हुए रुझान के कारण एससीआई वर्तमान में सुदुर-पूर्व, यू.के.-महाद्वीप तथा यूएसए (पूर्वी तट) को कवर करते हुए चार सेल्यूलर कंटेनर सेवाएं परिचालित करती हैं.  यू.के. महाद्वीप सेक्टर में अलग-अलग ब्रेक-बल्क तथा विशिष्ट कंटेनर दोनों सेवाएं प्रदान की जाती है|
 
 
• भारत/सुदूर पूर्व सेल्यूलर सेवा (इंडफैक्स)

• भारत/सुदूर पूर्व सेल्यूलर सेवा-2 (इंडफैक्स 2)

• भारतीय उपमहाद्वीप यूरोप सेवा (आईएसईएस)

• भारत यूएसए -पूर्व सीधी सेवा (आईडीएक्स)

• ब्रेक बल्क सेवा

• यात्री एवं कारगो सेवा

• अन्य तटीय सेवाएं

(ii) बल्क कैरियर एवं टैंकर सेवा: बल्क कैरियर नौबेड़ा भारतीय व्यापार के ज्यादातर सभी ड्राय बल्क प्रकार के कारगो की आवाजाही में, मुख्यत: जापान को लौह-अयस्क का निर्यात करने तथा ऑस्ट्रेलिया से कोंकिग कोयला आयात करने में सेवारत रहता है.  कुछ जहाजों को भारतीय तट पर तथा कुछ जहाजों को क्रॉस ट्रेड पर भी नियोजित रखा गया है|
 
एससीआई के क्रूड टैंकरों का नौबेड़ा भारतीय रिफाइनरियों के लिए क्रूड ऑयल आयात करने तथा बॉम्बे हाई में उत्पादित स्वदेशी क्रूड कारगो की आवाजाही/भंडारण के लिए नियोजित रखा गया है|
 
ये प्रॉडक्ट टैंकर पेट्रोलियम उत्पादों की आयात तथा तटीय आवाजाही में लगाये गये हैं.एससीआई के विशेषीकृत जहाज एलपीजी के आयात व तटीय आवाजाही, फास्फोरिक एसिड के आयात तथा अमोनिया परिवाहित करने के लिए नियोजित किये गये हैं|
 
तरलीकृत प्राकृतिक गैस (संयुक्त उद्यम कंपनी) : तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) को भारतीय बिजली संयंत्रों के भावी ईंधन तथा केमिकल उद्योग के लिए सहायक भंडार के रुप में अभिज्ञात किया गया है.एससीआई ने एलएनजी के परिवहन को एक महत्वपूर्ण उन्नतिकारक क्षेत्र के रुप में अभिज्ञात किया है और इसलिए पेट्रोनेट एलएनजी परियोजना के रुप में वह एक सक्रिय भागीदार है|
 
• पेट्रोनेट एलएनजी प्रोजेक्ट (पीएलएल)

• नैशनल ईरानी टैंकर कंपनी के साथ एमओयू

• ईरानो हिंद शिपिंग कंपनी (आईएचएससी)

• एससीआई - फोर्ब्स
 
 
(iii) ऑफशोर सेवा : एससीआई ने अपनी सेवाओं में विविधता लाते हुए भारतीय तटदूर समुद्री व्यापार में भी कदम रखा है तथा भारतीय तेल उद्योग को उनकी देशी तेल खोजी गतिविधियों में महत्वपूर्ण ऑफशोर सपोर्ट सेवाएं प्रदान करता है|
 
उसके 10 एंकर हैंडलिंग टोविंग-कम-सप्लाई जहाज ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉपोरेशन के पास दीर्घावधि चार्टर पर हैं.पिछले कुछ वर्षों में एससीआई ने समुद्री सतह के नीचे किये जाने वाले अत्याधुनिक कार्यों (subsea jobs)  में सफल कार्यनिष्पादन की विशेषज्ञता विकसित कर ली है तथा तकनीकी दृष्टि से सक्षम ऑफशोर कॉन्ट्रक्टर के रुप में अच्छीखासी प्रतिष्ठा भी अर्जित की है.  वह ओएनजीसी के विशेषीकृत जहाज अर्थात् सिस्मिक सर्वे जहाज तथा वैल स्टीम्युलैशन जहाज को प्रबंधित करती है तथा ओएनजीसी के ओएसवी जहाजों के परिचालन एवं रखरखाव का कॉन्ट्रॅक्ट भी देखती है|
 
नवरत्न दर्जा:
 
भारत सरकार ने एससीआई को दिनांक 01.08.2008 को ``नवरत्न'' को दर्जा प्रदान किया, जिससे कंपनी को स्वायत्तता के साथ-साथ प्रत्यायोजन शक्तियां प्राप्त हुई|
 
एमओयू हस्ताक्षर करने वाला पीएसई : -  
 
• एससीआई पोत परिवहन मंत्रालय के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करता आ रहा है|
 
• एमओयू मूल्यांकन प्रणाली के तहत एससीआई बहुत ही अच्छा कार्यनिष्पादन देता आ रहा है तथा वर्ष 2006-07 तक पिछले 16 वर्ष से लगातार ``उत्कृष्ट'' रेटिंग प्राप्त करता रहा है|
 
• एससीआई ने वित्तीय वर्ष 2009-10 के लिए पोत परिवहन मंत्रालय, भारत सरकार के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर कर दिया है|
 
गुणवत्ता
 
• आईएसएम अनुपालन
 
• आईएसओ 9001:2000 गुणवत्ता मानक - गुणवत्ता प्रबंधन प्रणाली (QMS)
 
• आईएसपीएस कोड का कार्यान्वयन
 
 
आईएसपीएस कोड का कार्यान्वयन :
 
मानव संसाधन विकास: एससीआई के कार्मिकों का प्रोफाइल उसके नौबेड़े जैसा ही विस्तृत है, जिसमें मास्टर मरीनर, इंजीनियर, नेवल आर्किटेक्ट, बिजनेस ग्रॅज्युएट, चार्टर्ड/कॉस्ट एकाउंटेट, कम्प्यूटर स्पेशालिस्ट आदि का समावेश है.एससीआई ने मुख्यत: अपने कार्मिकों के प्रशिक्षण/पुन: प्रशिक्षण पर सदैव अधिक बल दिया है| 
 
एससीआई का समुद्री प्रशिक्षण संस्थान (एमटीआई)