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  • 16 Aug  Shipping Corporation of India
Shipping Corporation of India

कार्य

मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) द्वारा निष्पादित किए जाने वाले सतर्कता के कार्यों का दायरा व्यापक है, जिसमें हो चुके या होने वाले  भ्रष्टाचार के बारे में आसूचना इकट्ठी करना, उसे रिपोर्ट किए गए सत्यापन योग्य आरोपों की जाँच करना या करवाना, संबंधित अनुशासनिक प्राधिकारी की अगली कार्रवाई के लिए जाँच रिपोर्टों को संसाधित करना, जहाँ कहीं आवश्यक हो सलाह के लिए मामला आयोग को भेजना, अनुचित कार्य/कदाचार आदि को रोकने के लिए कदम उठाना आदि शामिल हैं| 
 
इस तरह मुख्य सतर्कता अधिकारी के कार्य मोटे तौर पर निम्नलिखित तीन भागों में वर्गीकृत हैं :
 
1. निवारक सतर्कता

2. दंडात्मक सतर्कता, और

3. निगरानी
 
जहाँ कदाचार एवं अन्य अनियमितताओं के लिए "निगरानी'' एवं "दण्डात्मक कार्रवाई''  निश्चित रुप से महत्वपूर्ण है, वहीं मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ)  द्वारा किए जाने वाले ``निवारक उपाय'' अपेक्षाकृत अधिक महत्वपूर्ण हैं क्योंकि इससे सतर्कता के कई मामलों के व्यापक रुप से घटने की संभावना रहती है|  

निवारक सतर्कता
भ्रष्टाचार को विशेष रुप से घटाने के लिए संथानम समिति ने निवारक उपायों का उल्लेख करते समय भ्रष्टाचार के चार प्रमुख कारणों का उल्लेख किया था -

(क) प्रशासनिक विलंब,

(ख) सरकार का विनियामक कार्रवाई के जरिए अपनी सामर्थ्य से अधिक का कार्यभार स्वयं पर लेना,

(ग) सरकारी कर्मचारियों की विभिन्न श्रेणियों में प्रदान की गई शक्तियों के प्रयोग में व्यक्तिगत विवेक की गुंजाइश,
(घ) नागरिकों के दैनंदिन कार्यों में आने वाले विभिन्न महत्वपूर्ण मामलों को हल करने के लिए जटिल प्रक्रियाएँ.
 
इस तरह, मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) से निवारक सतर्कता के संबंध में निम्न उपाय किये जाने अपेक्षित हैं :-
 
• अपने संगठन में मौजूदा प्रक्रियाओं में सुधार लाने की दृष्टि से वर्तमान प्रक्रिया एवं चलनों का अध्ययन करना, जो प्रक्रियाएँ या प्रथाएँ भ्रष्टाचार की संभावना पैदा करती हैं तथा विलंब के कारणों का भी पता लगाना, और जहाँ-जहाँ विलंब होते हों उन स्थानों का पता लगाना एवं विभिन्न चरणों में विलंब को न्यूनतम करने के लिए उपयुक्त कदम उठाना;
 
• विनियामक कार्यों का इस दृष्टि से समीक्षा करना कि क्या वे सब अत्यंत आवश्यक हैं और क्या उन कार्यो के निर्वहन का तरीका एवं नियंत्रण अधिकार का प्रयोग सुधार के लिए समर्थ है.
 
•  विवेक के प्रयोग पर नियंत्रण का पर्याप्त तरीका अपनाना ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विवेकाधिकार का प्रयोग मनमाने ढंग से न हो बल्कि पारदर्शी और सही तरीके से हो;
 
• विभिन्न मामलों को निपटाने की प्रक्रियाओं के संबंध में नागरिकों को शिक्षित करना और जहाँ तक संभव हो जटिल प्रक्रियाओं को सरल बनाना;
 
• अपने संगठन में उन क्षेत्रों का पता लगाना जहाँ भ्रष्टाचार की अधिक संभावना हो और यह सुनिश्चित करना कि उन क्षेत्रों में केवल सत्यनिष्ठ कर्मचारी ही तैनात हों;
 
• संदेहास्पद निष्ठा वाले कर्मचारियों की सूची बनाना.  सूची में उन कर्मचारियों का नाम शामिल होगा जिनमें जांच के बाद या जाँच के दौरान सत्यनिष्ठा में कमी पाई गई हों, जैसे -
 
- सत्यनिष्ठा के अभाव के आरोप या नैतिक अपराध में शामिल होने के कारण न्यायालय में दोषी साबित हो गये हों किंतु जिन पर अपवादात्मक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए बर्खास्तगी, निष्कासन या अनिवार्य सेवानिवृत्ति का दण्ड न लगाया गया हो;
 
- सत्यनिष्ठा के अभाव के आरोपों पर या सरकार के हित की रक्षा में डयूटी की घोर अवहेलना करने के लिए विभाग द्वारा बड़ा दण्ड दिया गया हो, किंतु भ्रष्टाचार के इरादे से जुड़ा प्रमाण न हो;
 
- सत्यनिष्ठा का अभाव या नैतिक अधमता सहित अभिकथित कार्य के लिए बड़े दण्ड के लिए जिनके खिलाफ न्यायालय में मुकदमा चल रहा हो, और
 
- जिस पर मुकदमा चलाया गया था, किंतु बाद में तकनीकी आधार पर छूट गया हो, क्योंकि उसकी सत्यनिष्ठा के बारे में युक्तिसंगत संदेह की गुंजाइश रह गई हो.
 
 केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के परामर्श से ``सहमत सूची'' तैयार करना - इस सूची में उन कर्मचारियों का नाम शामिल होगा जिनके ईमानदारी या सत्यनिष्ठा के विरुद्ध शिकायतें, संदेह या संशय हों;
 
 यह सुनिश्चित करना कि संदेहास्पद निष्ठा वाले लोगों की सूची में और सहमत सूची में शामिल कर्मचारी संवेदनशील/भ्रष्टाचार के संभावना वाले क्षेत्रों में तैनात न हों,
 
 कर्मचारियों का आवधिक रोटेशन सुनिश्चित करना, और
 
 यह सुनिश्चित करना कि संगठन ने महत्वपूर्ण विषयों जैसे क्रय, संविदा आदि पर नियम पुस्तक तैयार किया हो और ये नियम पुस्तक समय-समय पर अद्यतन किए जाते हों और आयोग द्वारा जारी दिशानिदेर्शों के अनुरुप हों.
 
दंडात्मक सतर्कता
 
मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ) से यह अपेक्षा है कि वे संसदीय समितियों की रिपोर्टों की संवीक्षा करें, जैसे अनुमान समिति, लोक लेखा समिति और सार्वजनिक उपक्रम पर समिति, लेखा परीक्षा रिपोर्ट, संसद के दोनों सदनों की कार्यवाहियाँ, तथा पे्रस में आने वाली शिकायतें एवं आरोप तथा उन पर उचित कार्रवाई करना|
 
प्रमुखता से, सीवीओ से दंडात्मक सतर्कता पहलुओं पर निम्नलिखित कार्रवाई अपेक्षित है:
 
• सभी स्रोतों से शिकायतें प्राप्त करना एवं उनकी जाँच करना ताकि यह पता लगाया जा सके कि आरोपों में सतर्कता पहलु शामिल है अथवा नहीं, संदेह हो तो मुख्य सतर्कता अधिकारी (सीवीओ)अपने प्रशासनिक प्रधान को मामला भेज सकता है;
 
• सतर्कता संबंधी ऐसे विशेष एवं प्रमाणित होने वाले आरोपों की जाँच करना या जाँच करवाना;
 
• अग्रेषित किये गये आरोपों की जाँच आयोग या केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा कराना या करवाना;

• की जाने वाली अगली कार्रवाई के बारे में सक्षम प्राधिकारी का आदेश प्राप्त करने के लिए जाँच रिपोर्टों को शीघ्रता से प्रोसेस करना और जहाँ कहीं आवश्यक हो जाँच रिपोर्टों पर आयोग की सलाह भी प्राप्त करना;
 
• यह सुनिश्चित करना कि संबंधित कर्मचारियों के आरोप पत्र का मसौदा उपयुक्त तरीके से तैयार किया गया है एवं उन्हें शीघ्रता से जारी किया गया है; 
 
• यह सुनिश्चित करना कि जहाँ कहीं आवश्यक हो जाँच प्राधिकारियों की नियुक्ति में विलंब न हो;
 
• जाँच के दौरान अभियोजन एवं बचाव पक्ष द्वारा प्राप्त साक्ष्य को ध्यान में रखते हुए जाँच अधिकारी की रिपोर्ट की जाँच करना और अगली कार्रवाई के लिए सक्षम अधिकारी का आदेश प्राप्त करना तथा जहाँ आवश्यक हो, आयोग की दूसरे चरण की और संघ लोक सेवा आयोग की सलाह लेना;
 
• यह सुनिश्चित करना कि संबंधित अनुशासनिक प्राधिकारी दोषी अधिकारी पर दण्ड लगाते समय स्पष्ट आदेश दें.  अनुशासनिक अधिकारी द्वारा जारी आदेश में यह दर्शाना चाहिए कि अनुशासनिक अधिकारी ने अपनी बौद्धिक शक्ति का प्रयोग किया और अपना स्वतंत्र निर्णय लिया है;
 
• यह सुनिश्चित करना कि अनुशासनिक कार्यवाही के संबंध में हर चरण पर सभी संबंधितों द्वारा नियमों का अनुपालन किया गया है क्योंकि नियमों का कोई उल्लंघन संपूर्ण कार्यवाही को रद्द कर देगा;
 
• यह सुनिश्चित करना कि हर स्तर पर सतर्कता मामलों के प्रोसेस के लिए विहित समय सीमा का कड़ाई से अनुपालन किया गया है.
 
निगरानी
 
• हर महीने के पहले सप्ताह में लंबित मामलों, जैसे जाँच रिपोर्ट, अनुशासनिक मामलों एवं अन्य सतर्कता शिकायतों की समीक्षा करना|

• मंत्रालय/विभाग के सचिव के साथ बैठकों में सतर्कता कार्य की समीक्षा करना|

• परस्पर हित के मामलों पर चर्चा के लिए केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के अधिकारियों के साथ आवधिक बैठकें|

• यह सुनिश्चित करना कि किए गए कार्यों की मासिक रिपोर्ट आयोग को अगले महीने की 5 तारीख तक प्रस्तुत की  जाए|

• सतर्कता मामलों पर पिछले वर्ष की वार्षिक रिपोर्ट अगले महीने की 30 जनवरी तक आयोग को प्रस्तुत की जाएं|

• यह सुनिश्चित करना कि तिमाही प्रगति रिपोर्ट समाप्त तिमाही के अगले महीने की 15 तारीख तक सीटीई को प्रस्तुत की गई है|