एससीआई भारत का सबसे बड़ा टैंकर मालिक है जिसमें सभी आकार के कच्चे तेल टैंकरों का विविधिकृत बेड़ा है जैसे एम आर, एल आर-I,एल -II, अफ्रामैक्स, सुएजमैक्स और वीएलसीसी टैंकर. एस सी आई का टैंकर टन भार 1970 के मध्य से भारतीय तेल उद्योग की वृद्धि के समानांतर रहा है|
1990 की दशक के अंत तक टन भार महत्वपूर्ण रुप से भारतीय कच्चे तेल और उत्पाद परिवहन की आवश्यकताओं को पूरा किया. कई वर्षो में भारत में टर्मिनलों / बंदरगाहों की विशिष्ट कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए और बुनियादी सुविधाओं की कमी जैसे ड्राफ्ट पैकेजों की उपलब्धता, जेटी की लम्बाई / क्षमता आदि का ध्यान रखते हुए टनभार अधिग्रहीत किया गया था|
विभिन्न भारतीय तेल रिफाइनरियों को कच्चा तेल पहुंचाने के लिए टैंकर वाणिज्यिक विभाग टैंकरों की समय सारिणी बनाता है और उनका संघटन करता है. टैंकरों के तेजी से आवा-जाही को सुगम बनाने के लिए पूर्वी और पश्चिमी तटों पर लाइटरेज प्रचालन भी किया जाता है, अन्यथा बंदरगाहों के प्रतिबंधों / सीमाओं के कारण वे बंदरगाहों पर नहीं पहुंच सकते. माल वहन करार के अंतर्गत विभाग कार्गो उठाने के अपने दायित्वों को पूरा करने के लिए अंतर चार्टर्ड टन भार का वाणिज्यिक संघटन भी सुनिश्चित करता है|
ग्राहक / टैंकर सेवाओं के उपयोगकर्ता तेल रिफाइनरियों को समय पर कच्चे तेल की डिलिवरी और विनिर्दिष्ट दिनों के भीतर टनभार के संघटन के अलावा एस सी आई से आशा करते हैं कि एस सी आई माल वहन करार में यथा विनिर्दिष्ट कच्चे तेल / उत्पादों की नामित मात्रा को उठाने के अपने दायित्वों को पूरा करे. वे यह भी आशा करते हैं कि डिलिवर किया गया कार्गो लदान बिल में उल्लिखित सही विनिर्देशन के अनुसार ही हो और कार्गो में किसी प्रकार का प्रदूषण या खराबी नहीं होनी चाहिए|
सही स्थान पर, सही समय पर, पेट्रोलियम उत्पादों की सही मात्रा और गुणवत्ता की डिलिवरी, सुरक्षा मानदंडो के कड़ाई से अनुपालन की भी आशा की जाती है|